हाथी और चूहा की कहानी | Motivation Story |

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                   हाथी और चूहा की कहानी                         

    जिंदगी में कभी-कभी दो विपरीतो का प्रसंग इतना रोचक हो जाता है कि लोग सदियों तक चटकारे ले-लेकर उनके किस्से सुनते रहते हैं. अब मिसाल के लिए हाथी और चूहे को ही ले लें. आकार के मामले में दोनों धरती के दो धुरुवों की तरह एक-दुसरे से विपरीत है. गजब का बात यह कि दोनों का आमना-सामना नहीं होता, लेकिन किसी ने शपथ थोड़ी ही ले रखी है? कभी-न-कभी किसी मोड़ पर मुलाकात हो भी सकती है.और जिस दिन हो जाती है, लोगों के लिए चर्चा के विषय का जुगाड़ कर ही जाती है. बस ऐसे ही संयोगवश एक दिन एक हाथी ने किसी छोटे चूहे को देख लिया. अब साधारणतः हाथी की नजर चूहे पर पडती नहीं है, पर यह भी कोई नियम तो है नहीं. सो उस दिन नज़र पड़ गई. स्वाभाविक तौर पर इतना छोटा दौड़ता जानवर देख हाथी चौक गया, और बड़े आश्चर्यजनक अंदाज में उसने उस चूहे से पूछा- यार तुम तो बड़े छोटे हो? हाथी ने यू हीं उसके छोटेपन पर आश्चर्य प्रकट किया था.
अब बात तो साधारण थी पर चूहे के भीतर छुपा काम्प्लेक्स यह सुनते ही उफान मार गया. और तुरंत बात सम्भालते हुए बोला- यह तो कुछ दिनों से तबियत खराब है वरना मै भी तुम्हारी तरह हट्टाकट्टा था. 

सार-  यदि गौर करें तो हम भी अपने कोम्लेक्सों के कारन सुबह से शाम तक न जाने कितनो को चूहे के अंदाज में ही जवाब देते रहते है. सवाल यह की हम बड़े-छोटेम नाटे-खोटे, बुद्धिमान या मुर्ख, धनवान, गरीब या स्ट्रगलर चाहे जो व जैसे हैं, मानने में क्या अड़चन है? हम जैसे भी हैं, हैं. महत्वपूर्ण तो हमारा वजूद है, इतनी सी बात हम क्यों नहीं समझते? 

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